Saturday, 5 October 2013

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ


नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ

हे आध्यशक्ति नवदुर्गा माता,
तेरे नाम से ही तमस मिट जाता ।

हे कष्टनिवारिणी मोक्षदायिनी माता,
तेरे नाम से ही जग भवसागर तर जाता ।

हे अष्टभुजाधारी जग कल्याणी माता,
तेरे दर से कोई खाली हाथ नही जाता ।

हे अम्बे अम्बालिका अम्बिका माता,
तेरे नाम को संसार निशदिन ध्याता ।

हे जगतारिणी शिव अर्धांगिनी माता,
रखना लाज हम बच्चों की तू ही हमारी भाग्यविधाता ।

जीतेन्द्र सिंह "नील"

Wednesday, 2 October 2013

घर की इज्जत



घर की इज्जत

कैसे महफूज़ रखूँ
अपने घर की इज्ज़त
हर तरफ वहशी दरिंदो का साया हैं
रखते हैं गढ़ाये हरवक्त
गिद्ध सी नज़रे
मेरे घर आँगन में
जैसे बोटी नोचने का उन्हें
निमंत्रण भिजवाया हैं
ताक पर रख दी इंसानियत
हैवानियत का मंज़र
उनकी आँखों में नज़र आया हैं
घर से निकलना
दूभर हो गया बेटियों का
हर माता-पिता सोचे
ये नराधम किस कोख का जाया हैं
क्यूँ बदल गयी सोच
आज के नौजवानों की
क्या हवस को ही
उन्होंने अपना मकसद बनाया हैं
चिंतित हैं हर घर आँगन
ऐसा बबुल का पेड़ कहीं
मेरे घर आँगन तो नहीं उग आया हैं

जीतेन्द्र सिंह "नील"

Tuesday, 1 October 2013

धरती पर चाँद

धरती पर चाँद

तू जिद्द ना मेरे खुदा 
मैंने तेरे सजदे में सर झुकाया हैं 

जीभर के दीदार कर लेने दे 
आज तू मेरा महबूब बनकर आया हैं


ये मेरी मोहब्बत का ही सिला हैं 
तेरे आते ही धरती पर चाँद उतर आया हैं 

झुक गया आसमाँ भी ज़मीं पर 
प्यार से तूने जो मुझे गले लगाया हैं 

मेरे अश्क बन गए हैं मोती 
 तेरी हथेली पर मेरे अश्क का कतरा जो आया हैं 

थाम ले मुझको अब तो अपनी बाहों में 
तू ही तो मेरा हमनवाज़ बनकर आया हैं

मुकम्मिल हो गया हूँ मैं तेरी पनाह में 
मेरे होटो पर जबसे तेरा नाम आया हैं 


जीतेन्द्र सिंह “नील”
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