Saturday, 16 March 2013

साँसों की सरगम





साँसों की सरगम



खनकती चूड़ियों की खन खन
जैसे तेरी साँसों की सरगम
मतवाला हो गया मेरा मन
सुनकर इनकी खन खन

छनकती पायलो की छन छन
जैसे झूमे नाचे धरती गगन
जिया मेरा भी हो गया मगन
सुनकर इनकी सुरीली छन छन

मनमोहक हैं तुम्हारे नयन
देख इनको जीना गये भूल
ये दिखाते हैं जीवन दर्पण
इन्ही से रोशन मेरा जीवन

जादुई हैं तुम्हारे कर-कमल
इनका स्पर्श हैं अमृत समान
स्पंदित करते सदा मुझमे प्राण
मुझको हैं इनपर अभिमान

करो  तुम प्यार से मेरा आलिंगन 
तुम्हारी दुरी अब नहीं होती सहन 
निष्प्राण ना हो जाए मेरा जीवन
तुम बन जाओ "नील" की धड़कन

"नील"

Saturday, 9 March 2013

चलो आज सन्डे मनाते हैं


चलो आज सन्डे मनाते हैं
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बीते सप्ताह की थकान मिटाते हैं
चलो आज सन्डे मनाते हैं
टूट चुकी आशाओ को फिर से जागते हैं
चलो आज सन्डे मानते हैं
तेरी मेरी सबकी सुनते सुनाते हैं
चलो आज सन्डे मनाते हैं
घर के कुछ काम निपटाते हैं
चलो आज सन्डे मनाते हैं
रूठो को मानते हैं मिलकर उधम मचाते हैं
चलो आज सन्डे मनाते हैं
परिवार और दोस्तों संग घुमने चलते हैं
चलो आज सन्डे मनाते हैं
चलो आज हम सब मिलकर फनडे मानते हैं
चलो आज सन्डे मनाते हैं
 

नील  

Friday, 8 March 2013

परिकल्पना

परिकल्पना


चाहत से अंजान  हैं वो मेरी

गीत ग़ज़ल कविता में मेरी
उनका ही नाम आता हैं
पढ़ती हैं वह जब रचना मेरी
वाह वाह कर खूब दाद दे जाती हैं

चेहरा मेरा शर्म से लाल हुआ जाता हैं
कौन हैं वह खुशनसीब, पूछकर चली जाती हैं

उसकी आँखों में जाने क्या कशिश हैं
दिल में प्यार का अहसास कराती हैं
जब भी होता हैं उससे सामना मेरा
वह नज़ारे झुकाकर चली जाती हैं

उसकी बातो में मेरा जिक्र होता हैं
तन्हाई में नाम मेरा गुनगुनाती हैं
मेरे खयालो में खोई-खोई रहती हैं
प्यार का इज़हार करने से कतराती हैं

मीठी हैं बोली उसकी जैसे मिश्री की डली
बातो से मुझे अपना बना जाती हैं

शर्म हया लाज़ उसके गहने हैं
भीड़ में भी शालीन नज़र आती हैं
सह्रदयता पहचान हैं हैं उसकी
यही अदा मुझे उसका दीवाना बना जाती हैं

"नील"
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